Mohabbat na sahi mukadma hi kar do mujh pe
ऐ मुहब्बत सही मुकदमा कर दे मुझ पे,
कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी!!
दिल तो हर किसी के पास होता है,
लेकिन सब दिलवाले नही होते!!
नमक जैसी हो गयी है जिंदगी, लो
ग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं!!
देख कर उसको तेरा यू पलट जाना,
नफरत बताती है तूने मुहब्बत गज़ब की थी!!
डूबे हुए को हमने बिठाया था अपनी कश्ती पे यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया!!
कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी!!
दिल तो हर किसी के पास होता है,
लेकिन सब दिलवाले नही होते!!
नमक जैसी हो गयी है जिंदगी, लो
ग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं!!
देख कर उसको तेरा यू पलट जाना,
नफरत बताती है तूने मुहब्बत गज़ब की थी!!
डूबे हुए को हमने बिठाया था अपनी कश्ती पे यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया!!

