Udne de in parindo ko ae dost
उड़ने दे इन परिंदों को ऐ दोस्त,
जो तेरे होंगे लौट ही आएँगे किसी रोज़!!
आज कोई शायरी नही बस इतना सुन लो
मे तन्हा हू और वजह तुम हो!!
रहते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नही होते,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नही होते!!
तेरी यादें हर रोज़ आ जाती है मेरे पास,
लगता है तुमने बेवफ़ाई नही सिखाई इनको!!
ज़िंदगी की हक़ीकत से दो चार हो,
अक्सर दिल अपना ही हम जला लेते है!!
जो तेरे होंगे लौट ही आएँगे किसी रोज़!!
आज कोई शायरी नही बस इतना सुन लो
मे तन्हा हू और वजह तुम हो!!
रहते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नही होते,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नही होते!!
तेरी यादें हर रोज़ आ जाती है मेरे पास,
लगता है तुमने बेवफ़ाई नही सिखाई इनको!!
ज़िंदगी की हक़ीकत से दो चार हो,
अक्सर दिल अपना ही हम जला लेते है!!

