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Gila Shikwa Shayari Part - Two

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Gila Shikwa Shayari Part - Two

Gila Shikwa Shayari
Gila Shikwa Shayari 

गिला शिकवा शायरी

मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं;
ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं;
जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन लो;
मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं।

गिला शिकवा शायरी

सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है;
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है;
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल;
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।

गिला शिकवा शायरी

मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था;
एक मैं अकेला था, बाकी काफिला भी उसका था;
साथ-साथ चलने की सोच भी उसकी थी;
फ़िर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था।

गिला शिकवा शायरी

तुझसे दोस्ती करने का हिसाब ना आया;
मेरे किसी भी सवाल का जवाब ना आया;
हम तो जागते रहे तेरे ही ख्यालों में;
और तुझे सो कर भी हमारा ख्वाब ना आया।

गिला शिकवा शायरी

वो रास्ते में पलटा तो रुक गया मैं भी;
फिर कदम, कदम न रहे, सफर, सफर न रहा;
नज़रों से गिराया उसको कुछ इस तरह हम ने;
कि वो खुद अपनी नज़रों में मुताबिर न रहा।

गिला शिकवा शायरी

किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही;
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही।

गिला शिकवा शायरी

अपना समझा तो कह दिया वरना;
गैरों से तो कोई गिला नहीं होता;
कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है;
मुफ्त में तो कोई तज़ुर्बा नहीं मिलता।

गिला शिकवा शायरी

हकीक़त कहो तो उनको ख्वाब लगता है;
शिकायत करो तो उनको मजाक लगता है;
कितनी शिद्दत से उन्हें याद करते हैं हम;
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।

गिला शिकवा शायरी

मिला वो भी नहीं करते, मिला हम भी नहीं करते;
वफ़ा वो भी नहीं करते, वफ़ा हम भी नहीं करते;
उन्हें रुस्वाई का दुःख, हमें तन्हाई का दर्द;
गिला वो भी नहीं करते शिकवा हम भी नहीं करते।

गिला शिकवा शायरी

एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा;
बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगा;
टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने;
अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगा।

गिला शिकवा शायरी

कोई जुदा हो गया कोई ख़फ़ा हो गया;
यह दुनिया के लोगों को क्या हो गया;
जिस सजदे में मुझे उस को माँगना था रब से;
अफ़सोस वही सजदा क़ज़ा हो गया।

गिला शिकवा शायरी

तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ और नहीं आता;
ज़िन्दगी गुजारने के बस दो ही तरीके हैं;
एक तुझे नहीं आता और एक मुझे नहीं आता।

गिला शिकवा शायरी

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है;
उनको घर का हर कमरा हर रोज़ सजाना होता है;
जिस देहरी की क़िस्मत में स्वागत या वंदनवार न हों;
उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है।

गिला शिकवा शायरी

तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया;
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ;
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है;
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।

गिला शिकवा शायरी

सजा लबों से अपने सुनाई तो होती;
रूठ जाने की वजह बताई तो होती;
बेच देता मैं खुद को तुम्हारे लिए;
कभी खरीदने की चाहत जताई तो होती।

गिला शिकवा शायरी

एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे;
अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे;
आज हमारी फिक्र नहीं है आपको;
कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे।

गिला शिकवा शायरी

मेरे प्यार को बहकावा समझ लिया उन्होंने;
मेरे एहसास को पछतावा समझ लिया उन्होंने;
मैं रोती रही उनकी याद में पर हुआ ये कि;
मुझे ही बेवफ़ा समझ लिया उन्होंने।

गिला शिकवा शायरी

रात क्या ढली सितारे चले गए;
गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए;
जीत सकते थे हम भी इश्क़ की बाज़ी;
पर उनको जिताने की धुन में हम हारे चले गए।

गिला शिकवा शायरी

दिलों को खरीदने वाले लोग हज़ार मिल जायेंगे;
तुमको दगा देने वाले बार-बार मिल जायेंगे;
मिलेगा न हमें तुम जैसा कोई;
मिलने को तो लोग हमें बेशुमार मिल जायेंगे!

गिला शिकवा शायरी

उनके होंठों पे मेरा नाम जब आया होगा;
ख़ुद को रुसवाई से फिर कैसे बचाया होगा;
सुन के फ़साना औरों से मेरी बर्बादी का;
क्या उनको अपना सितम न याद आय होगा?

गिला शिकवा शायरी

मोहब्बत से वो देखते हैं सभी को,
बस हम पर कभी ये इनायत नहीं होती;
मैं तो शीशा हूँ टूटना मेरी फ़ितरत है,
इसलिए मुझे पत्थरों से कोई शिकायत नहीं होती।

गिला शिकवा शायरी

जो आँसू दिल में गिरते हैं वो आँखों में नहीं रहते;
बहुत से हर्फ़ ऐसे हैं जो लफ़्ज़ों में नहीं रहते;
किताबों में लिखे जाते हैं दुनिया भर के अफ़साने;
मगर जिन में हक़ीक़त हो वो किताबों में नहीं रहते।

गिला शिकवा शायरी

कोई उम्मीद बर नहीं आती​;​​​​​
​कोई सूरत नज़र नहीं आती;​​
​​मौत का एक दिन मु'अय्यन है​;​​
​नींद क्यों रात भर नहीं आती​।

गिला शिकवा शायरी

दिल से मिले दिल तो सजा देते है लोग​;​​
​प्यार के जज्बातों को डुबा देते है लोग;​​
​दो इँसानो को मिलते कैसे देख सकते है​;​
जब साथ बैठे दो परिन्दो को भी उठा देते है लोग...

गिला शिकवा शायरी

कम से कम ​तन्हाई तो साथी है​;​
अपनी ​जिंदगी के हर एक पल की​;​​
चलो ये शिकवा भी दूर हुआ कि​;​​
किसी ने साथ नहीं दिया​।

गिला शिकवा शायरी

​कहने वालों का कुछ नहीं जाता​;
सहने वाले कमाल करते हैं;
कौन ढूंढें जवाब दर्दों के​;​
लोग तो बस सवाल करते है।

गिला शिकवा शायरी

इंतजार किस पल का किये जाते हो यारों;
प्यासों के पास समंदर नही आने वाला;
लगी है प्यास ​तो ​चलो रेत निचोड़ी जाए​;​
अपने हिस्से में समंदर नहीं आने वाला​।

गिला शिकवा शायरी

तेरी नज़रों से दूर जाने के लिए तैयार तो थे हम;
फिर इस तरह, नज़रें घुमाने की जरूरत क्या थी;​​
तेरे एक इशारे पे, हम इल्जाम भी अपने सिर ले लेते​;​
फिर बेवजह, झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थी।

गिला शिकवा शायरी

हकीक़त कहो तो उनको ख्वाब लगता है​;​
शिकायत करो तो उनको मजाक लगता है​;​
कितने सिद्दत से उन्हें याद करते है हम​;​
और एक वो है, जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है​।

गिला शिकवा शायरी

हर वक़्त का हंसना तुझे बर्बाद ना कर दे;
​तन्हाई के लम्हों में, कभी रो भी लिया कर;
​ए दिल तुझे दुश्मन की भी पहचान कहाँ;
​तु हल्का-ए-याराना में भी मोहतात रहा कर।

गिला शिकवा शायरी

काश वो नगमें हमें सुनाए ना होते;
आज उनको सुनकर ये आंसू ना आए होते;
अगर इस तरह भूल जाना ही था;
तो इतनी गहराई से दिल में समाए ना होते।

गिला शिकवा शायरी

​मेरी वफाएं सभी लोग जानते हैं;
उसकी जफ़ाएं सभी लोग जानते हैं;
वो ही ना समझ पाए मेरी शायरी;
दिल की सदाएं सभी लोग जानते है।

गिला शिकवा शायरी

वादा करते तो कोई बात होती;
मुझे ठुकराते तो कोई बात होती;
यूँ ही क्यों छोड़ दिया दामन;
कसूर बतलाते तो कोई बात होती।

गिला शिकवा शायरी

बर्बादी का दोष दुश्मनों को देता रहा मैं अब तलक;
दोस्तों को भी परख लिया होता तो अच्छा होता;
यूँ तो हर मोड़ पर मिले कुछ दगाबाज लेकिन;
आस्तीन को भी झठक लिया होता तो अच्छा होता।

गिला शिकवा शायरी

फूलों को तो बहारों में आना ही था;
खारों को क्यों संग में लाना था;
जिसे चाहा हमने दिल से अपनाया;
क्या उसी को हमसे दूर जाना था।

गिला शिकवा शायरी

जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए;
यादों के साये भी हमसे दूर हो गए;
हो गए तन्हा इस महफ़िल में;
कि हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए।

गिला शिकवा शायरी

उन लोगों का क्या हुआ होगा;
जिनको मेरी तरह ग़म ने मारा होगा;
किनारे पर खड़े लोग क्या जाने;
डूबने वाले ने किस-किस को पुकारा होगा।

गिला शिकवा शायरी

हुस्न भी था, कशिश भी थी;
अंदाज़ भी था, नक़ाब भी था;
हया भी थी, प्यार भी था;
अगर कुछ ना था तो बस इकरार।

गिला शिकवा शायरी

मत बनाना रिश्ता इस जहां में;
बहुत मुश्किल उन्हें निभाना होगा;
हर एक रिश्ता एक नया ग़म देगा;
एक तरफ बेबस तु और एक तरफ हँसता ज़माना होगा।

गिला शिकवा शायरी

कितना समझाया दिल को कि तु प्यार ना कर;
किसी के लिए खुद को बेक़रार ना कर;
वो तेरे लिए नहीं है नादान;
ऐ पागल किसी और की अमानत का इंतज़ार ना कर!

गिला शिकवा शायरी

खामोश थे हम तो मगरूर समझ लिया;
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया;
यही आप की खुशनसीबी है कि हम इतने क़रीब हैं;
फिर भी आप ने दूर समझ लिया!

गिला शिकवा शायरी

काश आपकी सूरत इतनी प्यारी ना होती;
काश आपसे मुलाक़ात हमारी ना होती;
सपनो में ही देख लेते हम आपको;
तो आज मिलने की इतनी बेकरारी ना होती!

गिला शिकवा शायरी

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गई है;
खामोशियों की आदत हो गई है;
ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से;
अगर है तो एक मोहब्बत, जो इन तन्हाईयों से हो गई है।

गिला शिकवा शायरी

बड़ी उम्मीद थी उनको अपना बनाने की;
तमन्ना थी उनके हो जाने की;
क्या पता था जिनके हम होना चाहते हैं;
उनको आदत ही नहीं थी किसी को अपना बनाने की!

गिला शिकवा शायरी

तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ आता नहीं;
ज़िंदगी गुज़ारने के दो ही तरीके हैं;
एक तुझे नहीं आता, एक मुझे नहीं आता!

गिला शिकवा शायरी

कितना बेबस है इंसान किस्मत के आगे;
कितना दूर है ख्वाब हकीकत के आगे;
कोई रुकी हुई सी धड़कन से पूछे;
कितना तड़पता है यह दिल मोहब्बत के आगे।

गिला शिकवा शायरी

​मैंने रब से कहा वो छोड़ के चली गई;
पता नहीं उसकी क्या मजबूरी थी;
रब ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं;
यह कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी।

गिला शिकवा शायरी

दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके;
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके;
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से;
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके।

गिला शिकवा शायरी

कुछ आँसू होते हैं जो बहते नहीं;
लोग अपने प्यार के बिना रहते नहीं;
हम जानते हैं आपको भी आती है हमारी याद;
पर जाने क्यों आप हमसे कहते नहीं।

गिला शिकवा शायरी

दिल की किस्मत बदल न पाएगा;
बंधनो से निकल न पाएगा​;
तुझको दुनिया के साथ चलना है​;​
तु मेरे साथ चल न पाएगा​।

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