Gila Shikwa Shayari
Gila Shikwa Shayari
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| Gila Shikwa Shayari |
गिला शिकवा शायरी
अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं;
किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाया;
तो किसी ने अपना बनाकर 'वक़्त' गुजार लिया!
गिला शिकवा शायरी
तकदीर बनाने वाले, तूने भी हद कर दी;
तकदीर में किसी और का नाम लिखा था;
और दिल में चाहत किसी और की भर दी!
गिला शिकवा शायरी
शिकायत है उन्हें कि हमें मोहब्बत करना नही आता;
शिकवा तो इस दिल को भी है;
पर इसे शिकायत करना नहीं आता।
गिला शिकवा शायरी
दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे!
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे!
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का!
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे!
गिला शिकवा शायरी
मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बाते!
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें!
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा!
करते थे हम भी कभी किताबों की बाते!
गिला शिकवा शायरी
इस कदर हम यार को मनाने निकले!
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले!
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा!
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले!
गिला शिकवा शायरी
एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है!
इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है!
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद!
फिर भी हर मोड़ पर उसी का इन्तज़ार क्यों है!
गिला शिकवा शायरी
इंतज़ार करते करते वक़्त क्यों गुजरता नहीं!
सब हैं यहाँ मगर कोई अपना नहीं!
दूर नहीं पर फिर भी वो पास नहीं!
है दिल में कहीं पर आँखों से दूर कहीं!
गिला शिकवा शायरी
हर शाम कह जाती है एक कहानी !
हर सुबह ले आती है एक नई कहानी !
रास्ते तो बदलते है हर दिन लेकिन !
मंजिल रह जाती है वही पुरानी !
गिला शिकवा शायरी
तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी!
आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं!
हम भी वही हैं दिल भी वही है!
न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं!
गिला शिकवा शायरी
भूल गए या, भुलाना चाहते हो?
दूर कर दिया, या जाना चाहते हो?
आजमा लिया, या आजमाना चाहते हो?
मैसेज कर रहे हो या अभी और पैसे बचाना चाहते हो?
गिला शिकवा शायरी
इन आंखो मे आंसू आये न होते;
अगर वो पीछे मुडकर मुस्कुराये न होते!
उनके जाने के बाद बस येही गम रहेगा;
कि काश वो हमारी ज़िन्दगी मे दूबारा आये न होते!
गिला शिकवा शायरी
फलक से चाँद उतारा गया;
मेरी आस का एक सहारा गया!
मैं दो बूँद पानी तरसती रही;
मेरे होंठों से ज़हर गुज़ारा गया!
गिला शिकवा शायरी
हमें उनसे कोई शिकायत नहीं;
शायद हमारी किस्मत में चाहत नहीं!
मेरी तकदीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गया;
पूछा तो कहा, "ये मेरी लिखावट नहीं"!
गिला शिकवा शायरी
हमें उनसे कोई सिकायत नहीं;
शायद हमारी किस्मत में चाहत नहीं!
मेरी तकदीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गया;
पूछा तो कहा, 'ये मेरी लिखावट नहीं'!
गिला शिकवा शायरी
एक सिलसिले की उम्मीद थी जिनसे;
वही फ़ासले बनाते गये!
हम तो पास आने की कोशिश में थे;
ना जाने क्यूँ वो हमसे दूरियाँ बढ़ाते गये!
गिला शिकवा शायरी
खुदा जाने, प्यार का दस्तूर क्या होता है;
जिन्हें अपना बनाया, वो न जाने क्यों दूर होता है;
कहते हैं कि मिलते नहीं ज़मीन आसमान;
फिर न जाने क्यूँ, आसमान ज़मीन का सरूर होता है!
गिला शिकवा शायरी
दीवाने तेरे हैं, इस बात से इनकार नहीं;
कैसे कहें कि हमें आपसे प्यार नहीं;
कुछ तो कसूर है आपकी निगाहों का;
हम अकेले तो गुनेहगार नहीं।
गिला शिकवा शायरी
नज़र चाहती है दीदार करना;
दिल चाहता है प्यार करना;
क्या बतायें इस दिल का आलम;
नसीब में लिखा है इंतजार करना!
गिला शिकवा शायरी
उल्फत में अक्सर ऐसा होता है;
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है;
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी;
हमसफर उनका कोई और होता है!
गिला शिकवा शायरी
मुझे सता के वो मेरी दुआएं लेता है;
उसे खबर है कि मुझे बद्दुआ नहीं आती;
सब कुछ सौप दिया उसे हमने;
फिर भी वो कहता है, हमें वफा नहीं आती!
गिला शिकवा शायरी
हमने सोचा कि सिर्फ हम ही उन्हें चाहते हैं;
मगर उनके चाहने वालों का तो काफ़िला निकला;
मैंने सोचा कि शिकायत करू खुदा से;
मगर वह भी उनके चाहने वालों में निकला!
गिला शिकवा शायरी
वादा करके वो निभाना भूल जाते हैं;
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;
ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की;
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
गिला शिकवा शायरी
सब फ़साने हैं दुनियादारी के,
किस से किस का सुकून लूटा है;
सच तो ये है कि इस ज़माने में,
मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है।
गिला शिकवा शायरी
ज़िंदा रहे तो क्या है, जो मर जायें हम तो क्या;
दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जायें हम तो क्या;
हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने;
एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या।
गिला शिकवा शायरी
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह;
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह;
किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी;
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह।
गिला शिकवा शायरी
वादा करके निभाना भूल जाते हैं;
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;
ऐसी आदत हो गयी है अब तो सनम की;
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
गिला शिकवा शायरी
कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था;
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था;
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है;
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।
गिला शिकवा शायरी
वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ;
ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ;
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ;
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ
गिला शिकवा शायरी
मेरा इल्ज़ाम है तुझ पर कि तू बेवफा था;
दोष तो तेरा था मगर तू हमेशा ही खफा था;
ज़िन्दगी की इस किताब में बयान है तेरी मेरी कहानी;
यादों से सराबोर उसका एक एक सफा था।
गिला शिकवा शायरी
कदम कदम पे बहारों ने साथ छोड़ दिया;
पड़ा जब वक़्त तब अपनों ने साथ छोड़ दिया;
खायी थी कसम इन सितारों ने साथ देने की;
सुबह होते देखा तो इन सितारों ने साथ छोड़ दिया।
गिला शिकवा शायरी
मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा;
खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा;
जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी;
उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा।
गिला शिकवा शायरी
ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको;
हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं;
बदले बदले से तो आप हैं जनाब;
जो हमारे अलावा सबको याद रखते हैं।
गिला शिकवा शायरी
रास्ते में पत्थरों की कमी नहीं है;
मन में टूटे सपनो की कमी नहीं है;
चाहत है उनको अपना बनाने की मगर;
मगर उनके पास अपनों की कमी नहीं है।
गिला शिकवा शायरी
वो भूल गए कि उन्हें हसाया किसने था;
जब वो रूठे थे तो मनाया किसने था;
वो कहते हैं वो बहुत अच्छे है शायद;
वो भूल गए कि उन्हें यह बताया किसने था।
गिला शिकवा शायरी
कहाँ से लाऊँ हुनर उसे मनाने का;
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का;
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी;
क्योंकि जुर्म मेरा था उनसे दिल लगाने का।
गिला शिकवा शायरी
उन्हें एहसास हुआ है इश्क़ का हमें रुलाने के बाद;
अब हम पर प्यार आया है दूर चले जाने के बाद;
क्या बताएं किस कदर बेवफ़ा है यह दुनिया;
यहाँ लोग भूल जाते ही किसी को दफनाने के बाद।
गिला शिकवा शायरी
मोहब्बत का मेरा यह सफर आख़िरी है;
ये कागज, ये कलम, ये गजल आख़िरी है;
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी;
क्योंकि तेरे दर्द का अब ये सितम आख़िरी है।
गिला शिकवा शायरी
ना जाने कौन सी बात पर वो रूठ गयी है;
मेरी सहने की हदें भी अब टूट गयी हैं;
कहती थी जो कि कभी नहीं रूठेगी मुझसे;
आज वो अपनी ही बातें भूल गयी है।
गिला शिकवा शायरी
मुद्दत से कोई शख्स रुलाने नहीं आया;
जलती हुई आँखों को बुझाने नहीं आया;
जो कहता था कि रहेंगे उम्र भर साथ तेरे;
अब रूठे हैं तो कोई मनाने नहीं आया।
गिला शिकवा शायरी
तुम ने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे;
तेरे आाँसू मेरी आँखों से निकल सकते थे;
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह;
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।
गिला शिकवा शायरी
दस्तूर-ए-उल्फ़त वो निभाते नहीं हैं;
जनाब महफ़िल में आते ही नहीं हैं;
हम सजाते हैं महफ़िल हर शाम;
एक वो हैं जो कभी तशरीफ़ लाते ही नहीं हैं!
गिला शिकवा शायरी
आग से सीख लिया हम ने यह करीना भी;
बुझ भी जाना पर बड़ी देर तक सुलगते रहना;
जाने किस उम्र में जाएगी यह आदत अपनी;
रूठना उससे और औरों से उलझते रहना।
गिला शिकवा शायरी
समझा न कोई हमारे दिल की बात को;
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
गिला शिकवा शायरी
दुनिया ने हम पे जब कोई इल्ज़ाम रख दिया;
हमने मुक़ाबिल उसके तेरा नाम रख दिया;
इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुख़ी;
नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया।
गिला शिकवा शायरी
दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया;
खाली ही सही होठों तक जाम तो आया;
मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने;
यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया।
गिला शिकवा शायरी
ज़िंदगी से चले हैं अब इल्ज़ाम लेकर;
बहुत जी चुके हैं अब उनका नाम लेकर;
अकेले बातें करेंगे अब वो इन सितारों से;
अब चले जायेंगे उन्हें यह सारा आसमान देकर।
गिला शिकवा शायरी
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते;
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते;
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम;
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते।
गिला शिकवा शायरी
भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत;
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी आता है;
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना;
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है।
गिला शिकवा शायरी
ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।


