Ishq Shayari Part - Four
Ishq Shayari Part - Four
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| Ishq Shayari in Hindi |
इश्क शायरी
मैं तेरे प्यार में इतना ग़ुम होने लगा हूँ;
जहाँ भी जाऊं बस तुम्हें ही सामने पाने लगा हूँ;
हालात यह हैं कि हर चेहरे में तू ही तू दिखता है;
ऐ मेरे खुदा अब तो मैं खुद को भी भुलाने लगा हूँ।
इश्क शायरी
दिल के लुट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं;
यह तमाशा सरे बाजार ज़रूरी तो नहीं;
मुझे था इश्क़ तेरी रूह से और अब भी है;
जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं।
इश्क शायरी
दुःख में ख़ुशी की वजह बनती है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनती है मोहब्बत;
जब कुछ भी अच्छा ना लगे हमें दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत।
इश्क शायरी
फूलों की याद आती है काँटों को छूने पर;
रिश्तों की समझ आती है फासलों पे रहने पर;
कुछ जज़्बात ऐसे भी होते हैं जो आँखों से बयां नहीं होते;
वो तो महसूस होते हैं ज़ुबान से कहने पर।
इश्क शायरी
तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िंदगी अपनी तेरी चाहत में सवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी;
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।
इश्क शायरी
अब आएं या न आएं इधर पूछते चलो;
क्या चाहती है उनकी नज़र पूछते चलो;
हम से अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ;
यारो कोई तो उनकी ख़बर पूछते चलो।
इश्क शायरी
फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम;
प्यार में झलकता जाम हो तुम;
सीने में छुपाये फिरते हैं चाहत तुम्हारी;
तभी तो मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
इश्क शायरी
अगर मैं हद से गुज़र जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
तेरे दिल में उतर जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
रात में तुझे तेरे दीदार की खातिर;
अगर मैं सब कुछ भूल जाऊं तो मुझे माफ़ करना।
इश्क शायरी
माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उसके दिल में, उसकी यादो में कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।
इश्क शायरी
ऐसा जगाया आपने कि अब तक ना सो सके;
यूँ रुलाया आपने कि महफ़िल में हम ना रो सके;
ना जाने क्या बात है आप में सनम;
माना है जबसे तुम्हें अपना किसी के ना हम हो सके।
इश्क शायरी
लाख बंदिशें लगा दे यह दुनिया हम पर;
मगर दिल पर काबू हम कर नहीं पायेंगे;
वो लम्हा आखिरी होगा हमारी ज़िन्दगी का;
जिस पल हम तुझे इस दिल से भूल जायेंगे।
इश्क शायरी
किसी पत्थर में मूर्त है, कोई पत्थर की मूर्त है;
लो हम ने देख ली दुनिया, जो इतनी खूबसूरत है;
ज़माना अपनी न समझे कभी पर मुझे खबर है;
कि तुझे मेरी ज़रूरत है और मुझे तेरी ज़रूरत है।
इश्क शायरी
तेरा एहसान हम कभी चुका नहीं सकते;
तू अगर माँगे जान तो इंकार कर नहीं सकते;
माना कि ज़िंदगी लेती है इम्तिहान बहुत;
तू अगर हो हमारे साथ तो हम कभी हार नहीं सकते।
इश्क शायरी
आँखों में चाहत दिल में कशिश है;
फिर क्यों ना जाने मुलाकात में बंदिश है;
मोहब्बत है हम दोनों को एक-दूसरे से;
फिर भी दिलों में ना जाने यह रंजिश क्यों है।
इश्क शायरी
कुछ उलझे हुए सवालों से डरता है दिल;
ना जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल;
किसी को पा लेना कोई बड़ी बात तो नहीं;
पर उनको खोने से डरता है यह दिल।
इश्क शायरी
क्या मांगू खुदा से तुम्हें पाने के बाद;
किसका करूँ इंतज़ार तेरे आने के बाद;
क्यों इश्क़ में जान लुटा देते हैं लोग;
मैंने भी यह जाना तुमसे इश्क़ करने के बाद।
इश्क शायरी
दुःख में ख़ुशी की वजह बनी है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनी है मोहब्बत;
जब कुछ भी ना रहा था अच्छा इस दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनी है यह मोहब्बत।
इश्क शायरी
मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा होगा;
बन के रूह मेरे जिस्म में उतर जाओ तो अच्छा होगा;
किसी रात तेरी गोद में सिर रख के सो जाऊं;
फिर उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा होगा।
इश्क शायरी
जब कोई ख्याल दिल से टकराता है;
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है;
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है;
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है।
इश्क शायरी
माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उस के दिल मे, उसकी यादो मे कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।
इश्क शायरी
करिये तो कोशिश हमको याद करने की;
फुर्सत के लम्हे तो अपने आप मिल जायेंगे;
दिल में अगर है चाहत हमसे मिलने की;
बहाने मिलने के खुद-ब-खुद बन जायेंगे।
इश्क शायरी
रात होगी तो चाँद दुहाई देगा;
ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा;
ये मोहब्बत है ज़रा सोच कर करना;
एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा।
इश्क शायरी
ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा;
क्योंकि हशर की परवाह मैं नहीं करता;
फनाह होना तो रिवायत है तेरी;
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।
इश्क शायरी
जो रहते हैं दिल में वो जुदा नहीं होते;
कुछ एहसास लफ़्ज़ों से बयां नहीं होते;
एक हसरत है कि उनको मनाये कभी;
एक वो हैं कि कभी खफा नहीं होते।
इश्क शायरी
तू ही मिल जाये मुझे ये ही काफ़ी है;
मेरी हर साँस ने बस यही दुआ माँगी है;
जाने क्यों दिल खींचा जाता है तेरी तरफ़;
क्या तुमने भी मुझे पाने की कोई दुआ माँगी है।
इश्क शायरी
ज़िंदगी जीने के लिए मुझे दुआ चाहिए;
उस पर किस्मत की भी वफ़ा चाहिए;
खुदा के रहम से सब कुछ है मेरे पास;
बस प्यार करने के लिए आप जैसा कोई महबूब चाहिए।
इश्क शायरी
चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;
मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;
देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना;
अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं।
इश्क शायरी
कभी मोहब्बत करो तो हमसे करना;
दिल की बात जुबाँ पर आये तो हम से कहना;
न कह सको कुछ तो आँखें झुका लेना;
हम समझ जायेंगे हमें तुम न कुछ कहना।
इश्क शायरी
ज़माने भर में आशिक कोई हमसा नही होगा;
खूबसूरत सनम भी कोई तुमसा नहीं होगा;
मर भी जाये उसकी बाहों में तो कोई गम नही यारो;
क्योंकी उसके आँचल से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होगा।
इश्क शायरी
जो एक बार दिल में बस जाये उसे हम निकाल नहीं सकते;
जिसे दिल अपना बना ले उसे फिर कभी भुला नहीं सकते;
वो जहाँ भी रहे ऐ खुदा हमेशा खुश रहे;
उनके लिए कितना प्यार है हमें ये कभी हम जता नहीं सकते।
इश्क शायरी
बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हें;
बड़ी दुआओं से पाया है तुम्हें;
तुम ने भुलाने का सोचा भी कैसे;
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।
इश्क शायरी
हर घडी एक नाम याद आता है;
कभी सुबह, कभी शाम याद आता है;
सोचते हैं हम कि कर लें फिर से मोहब्बत;
फिर हमें मोहब्बत का अंजाम याद आता है।
इश्क शायरी
इस दिल की हर धड़कन का एहसास हो तुम;
तुम क्या जानो हमारे लिए कितने ख़ास हो तुम;
जुदा होकर तुमने हमे मौत से भी बदतर सज़ा दी है;
फिर भी इस तड़पते हुए दिल ने तुम्हें खुश रहने की दुआ दी है।
इश्क शायरी
उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था;
कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था;
बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम;
प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।
इश्क शायरी
प्यासी ये निगाहें तरसती रहती हैं;
तेरी याद में अक्सर बरसती रहती हैं;
हम तेरे ख्यालों में डूबे रहते हैं;
और ये ज़ालिम दुनिया हम पे हँसती रहती है।
इश्क शायरी
चाहत के ये कैसे अफ़साने हुए;
खुद नज़रों में अपनी बेगाने हुए;
अब दुनिया की नहीं कोई परवाह हमें;
इश्क़ में तेरे इस कदर दीवाने हुए।
इश्क शायरी
ना दिल से होता है, ना दिमाग से होता है;
ये प्यार तो इत्तेफ़ाक़ से होता है;
पर प्यार करके प्यार ही मिले;
ये इत्तेफ़ाक़ भी किसी-किसी के साथ होता है।
इश्क शायरी
फिर से वो सपना सजाने चला हूँ;
उमीदों के सहारे दिल लगाने चला हूँ;
पता है कि अंजाम बुरा ही होगा मेरा;
फिर भी किसी को अपना बनाने चला हूँ।
इश्क शायरी
आईने में भी खुद को झांक कर देखा;
खुद को भी हमने तनहा करके देखा;
पता चल गया हमें कितनी मोहब्बत है आपसे;
जब तेरी याद को दिल से जुदा करके देखा।
इश्क शायरी
देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं;
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं;
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर;
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।
इश्क शायरी
बेवजह हम वजह ढूंढ़ते हैं तेरे पास आने को;
ये दिल बेकरार है तुझे धड़कन में बसाने को;
बुझी नहीं प्यास इन होंठों की अभी;
न जाने कब मिलेगा सुकून तेरे इस दीवाने को।
इश्क शायरी
यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन;
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे;
बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;
ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।
इश्क शायरी
तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है;
हर पल अधूरी सी लगती है;
अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे;
क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।
इश्क शायरी
तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे;
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे;
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो;
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।
इश्क शायरी
संगमरमर के महल में तेरी ही तस्वीर सजाऊंगा;
मेरे इस दिल में ऐ प्यार तेरे ही ख्वाब सजाऊंगा;
यूँ एक बार आजमा के देख तेरे दिल में बस जाऊंगा;
मैं तो प्यार का हूँ प्यासा जो तेरे आगोश में मर जाऊॅंगा।
इश्क शायरी
तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं;
गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं;
हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें;
तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।
इश्क शायरी
आज असमान के तारों ने मुझे पूछ लिया;
क्या तुम्हें अब भी इंतज़ार है उसके लौट आने का!
मैंने मुस्कुराकर कहा;
तुम लौट आने की बात करते हो;
मुझे तो अब भी यकीन नहीं उसके जाने का!
इश्क शायरी
फूल खिलते रहे जिंदगी की राह में;
हंसी चमकती रहे आपकी निगाह में;
कदम कदम पर मिले ख़ुशी की बाहर आपको;
दिल देता है यही दुआ बार-बार आपको;
वेलेंटाइन डे की शुभकामनाए!
इश्क शायरी
इश्क है वही जो हो एक तरफा;
इजहार है इश्क तो ख्वाईश बन जाती है;
है अगर इश्क तो आँखों में दिखाओ;
जुबां खोलने से ये नुमाइश बन जाती है।
इश्क शायरी
बगैर जाने-पहचाने इक़रार ना कीजिये;
मुस्कुरा कर यूँ दिलों को बेक़रार ना कीजिये;
फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी;
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये।


