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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर कैसा होना चाहिए | house according to vastu shastra

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसका उद्देश्य घर और अन्य निर्माण कार्यों को ऐसे आयाम और संरचना में करना है जो मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुष्ट करती हो। वास्तु शास्त्र में विभिन्न सिद्धांत और दिशानिर्देश हैं, जो आपको घर की संरचना, कमरों की स्थापना, दरवाजों, खिड़कियों, रंगों, उपकरणों और सामग्री के बारे में निर्देशित करते हैं। यहां कुछ मुख्य बिंदुओं को दिया गया है जिन्हें ध्यान में रखते हुए आप अपने घर को स्वस्थ्य और सुखी बना सकते हैं:

  1. घर का स्थान: आपके घर का स्थान वातावरण, प्राकृतिक तत्वों, सुर्योदय और सूर्यास्त की दिशा के साथ मेल खाना चाहिए। साथ ही, सड़कों, नदियों, झरनों और औद्योगिक क्षेत्रों की निकटता का भी ध्यान रखना चाहिए।
  2. घर की संरचना: वास्तु शास्त्र में उपयुक्त घर की संरचना के बारे में दिशानिर्देश दिए गए हैं। आवासीय क्षेत्र को उचित ढंग से विभाजित करना चाहिए, और कमरों की स्थापना, बाथरूम और रसोई की स्थान संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
  3. रंगों का चयन: वास्तु शास्त्र के अनुसार रंगों का चयन महत्वपूर्ण है। ध्यान देने योग्य रंगों का चयन करने से आपके घर की ऊर्जा बढ़ती है और शांति, सुख, और समृद्धि की भावना बनी रहती है।
  4. दरवाजे और खिड़कियां: वास्तु शास्त्र में दरवाजों और खिड़कियों के संबंध में विशेष दिशानिर्देश दिए गए हैं। उन्हें स्वच्छ और सुखद रखें और उनकी स्थापना सही दिशा में करें।
  5. उपकरण और सामग्री: वास्तु शास्त्र के अनुसार उपयुक्त उपकरण और सामग्री का चयन करना आवश्यक है। घर में उचित प्रकार के फर्नीचर, आरामदायक बिस्तर, पौधों की उपस्थिति, आकृति के अनुसार निर्मित वस्त्रालय आदि शामिल होने चाहिए।

घर का स्थान

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का स्थान विचारशीलता, सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा, प्राकृतिक तत्वों और वातावरण के साथ मेल खाना चाहिए। यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदुएं हैं जिन्हें घर के स्थान का चयन करते समय ध्यान में रखना चाहिए:

  1. उद्दीपनीय स्थान: घर का स्थान ऐसा होना चाहिए जहां ऊर्जा का प्रवाह निरंतर रहे और जहां प्राकृतिक रूप से प्रकाश आ सके। सूर्य की किरणें स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकें।
  2. निकटता का महत्व: स्थान की निकटता भी महत्वपूर्ण है। आपके घर के आस-पास के दृश्य, जैसे पार्क, झरने, नदियाँ या हरे भरे मैदान, सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। आपके आस-पास शोरगुल, औद्योगिक क्षेत्र या दुष्ट प्रभाव की कमी वाले स्थानों से दूर रहने की कोशिश करें।
  3. जलसंयोग: वास्तु शास्त्र में जलसंयोग का महत्व बताया गया है। घर का स्थान ऐसा होना चाहिए जहां स्वच्छ पानी का आसान उपयोग हो सके। इसके लिए, आपके घर के निकट किसी नदी, झील या पूर्णतः शुद्ध पानी की संपर्क करने वाले स्थान होने चाहिए।
  4. दोष मुक्त भूमि: अगर आप नए घर का चयन कर रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार दोष मुक्त भूमि चुनना महत्वपूर्ण है। पूर्वाचल, ईशान या उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित भूमि प्राकृतिक ऊर्जा को बढ़ाती है और आनंद और समृद्धि की भावना को जगाती है।

यहां दिए गए बिंदुओं के आधार पर आपको अपने घर का स्थान चुनने में मदद मिलेगी। ध्यान दें कि यह सामान्य दिशा-निर्देश हैं और आपके नगर या क्षेत्र के स्थानीय नियमों और परंपराओं का भी पालन करना चाहिए।

घर की संरचना

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की संरचना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यहां कुछ मुख्य बिंदुएं हैं जिन्हें ध्यान में रखते हुए घर की संरचना कर सकते हैं:

  1. कमरों की स्थापना: वास्तु शास्त्र में उपयुक्त कमरों की स्थापना के बारे में निर्देश दिए गए हैं। आवासीय घर में आम तौर पर शोचालय, रसोई, बेडरूम, पूजा स्थान, ग्रह प्रवेश और निजी स्थानों की व्यवस्था होनी चाहिए। कमरों को बड़े और व्यापक बनाने के बजाय उन्हें संघटित और सुविधाजनक बनाने का प्रयास करें।
  2. दरवाजे और खिड़कियाँ: वास्तु शास्त्र में दरवाजों और खिड़कियों के संबंध में विशेष दिशानिर्देश दिए गए हैं। उन्हें स्वच्छ और सुखद रखें और उनकी स्थापना सही दिशा में करें। इसके लिए, समय-समय पर दरवाजों और खिड़कियों की सफाई और मरम्मत करते रहें और उन्हें स्वतंत्र रूप से खुलने-बंद होने दें।
  3. रंगों का चयन: रंगों का चयन घर की संरचना में बहुत महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र में ध्यान देने योग्य रंगों का चयन करने से आपके घर की ऊर्जा बढ़ती है और शांति, सुख, और समृद्धि की भावना बनी रहती है। पूर्वाग्रह और उत्तराग्रह में उज्ज्वल रंग, पश्चिमाग्रह में नीले रंग और निर्माण क्षेत्रों में मिट्टी के रंग का उपयोग कर सकते हैं।
  4. आकृति और सामग्री: वास्तु शास्त्र में उपयुक्त आकृति और सामग्री का चयन करने की सलाह दी जाती है। आपके घर में उचित प्रकार के फर्नीचर, आरामदायक बिस्तर, पौधों की उपस्थिति, आकृति के अनुसार निर्मित वस्त्रालय, आदि शामिल होने चाहिए। आपके घर में प्राकृतिक तत्वों जैसे पत्थर, लकड़ी, सोना, सोने की चीजें, चांदी, आदि का उपयोग करने की कोशिश करें।

रंगों का चयन

रंगों का चयन घर की संरचना में महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि रंगों का आपसी मेल और प्रभाव मनोवैज्ञानिक रूप से हमारे मन और भावनाओं पर प्रभाव डालता है। वास्तु शास्त्र में विभिन्न रंगों को विभिन्न दिशाओं और कमरों के लिए संदर्भित किया जाता है। यहां कुछ रंगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है:

  1. नीला: नीले रंग को शांति, संतुलन और विश्राम का प्रतीक माना जाता है। इसे गहरे ब्लू या स्काय ब्लू के रूप में चुना जा सकता है। नीले रंग का उपयोग बेडरूम, मनोरंजन कक्ष या स्थिरता और निर्माण क्षेत्र में किया जा सकता है।
  2. हरा: हरे रंग को प्रकृति, प्रकाश, उच्चता और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। इसे न्यूट्रल ग्रीन या प्राकृतिक हरे के रूप में चुना जा सकता है। हरे रंग का उपयोग लिविंग रूम, ग्रीनरी, वृक्षारोपण क्षेत्र या दिनचर्या कक्ष में किया जा सकता है।
  3. पीला: पीले रंग को सूर्य की किरणों, सुख, समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे गहरे पीले या सोने के रंग के रूप में चुना जा सकता है। पीले रंग का उपयोग पूजा स्थान, रसोई, डाइनिंग रूम या सोलरियम में किया जा सकता है।
  4. लाल: लाल रंग को प्रेम, प्रोत्साहन, ऊर्जा और आक्रामकता का प्रतीक माना जाता है। इसे गहरे लाल या रूबी रेड के रूप में चुना जा सकता है। लाल रंग का उपयोग रेडियेटर या ऊर्जा केंद्र, सोशल ऐरियों या प्रमुख सक्रिय कक्षों में किया जा सकता है।
  5. गुलाबी: गुलाबी रंग को सौहार्द, स्नेह, आनंद और नरमी का प्रतीक माना जाता है। इसे पेस्टल पिंक या गुलाबी के रूप में चुना जा सकता है। गुलाबी रंग का उपयोग बच्चों के कमरे, स्पा स्टाइल बाथरूम या तंदुरुस्ती कक्ष में किया जा सकता है।

यदि आपको अपने घर के लिए रंगों का चयन करने में संदेह हो रहा है, तो आपको अपने व्यक्तिगत पसंद और आपके आस-पास के माहौल को भी ध्यान में रखना चाहिए। व्यक्तिगत प्राथमिकताओं औरवस्तुतः, रंगों का चयन व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और पसंद के आधार पर किया जाना चाहिए। हालांकि, यदि आप वास्तु शास्त्र के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित सामान्य दिशानिर्देशों का पालन कर सकते हैं:

  1. पूर्वाग्रह (पूर्व दिशा): यहां गर्म और उज्ज्वल रंगों का उपयोग किया जा सकता है। इससे घर में ऊर्जा का अनुभव होता है और सक्रियता बढ़ती है।
  2. पश्चिमाग्रह (पश्चिम दिशा): यहां ठंडे और आकर्षक रंगों का उपयोग किया जा सकता है। इससे धीरज, स्थिरता और आराम की भावना होती है।
  3. उत्तराग्रह (उत्तर दिशा): यहां शांति और प्रीति को प्रकट करने के लिए प्रकृति के हरे रंग का उपयोग किया जा सकता है।
  4. दक्षिणाग्रह (दक्षिण दिशा): यहां उष्ण और रोमांचक रंगों का उपयोग किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक ऊर्जा का आनंद लिया जा सकता है।

दरवाजे और खिड़कियां

वास्तु शास्त्र में दरवाजों और खिड़कियों के संबंध में विशेष महत्व है। यहां कुछ मुख्य दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं जो आपको दरवाजों और खिड़कियों के चयन के समय ध्यान में रखने में मदद करेंगे:

  1. दरवाजों की स्थापना: दरवाजे घर की प्रवेश द्वार होते हैं और इसलिए उनकी स्थापना को सही तरीके से करना महत्वपूर्ण है। प्रमुख प्रवेश द्वार को प्रकाश की सुविधा के लिए अदरक बाजूदार और विशाल रखने की कोशिश करें।
  2. दरवाजे के रंग: दरवाजों के रंग का चयन आपकी प्राथमिकताओं, आपके घर की संरचना और वातावरण के साथ मेल खाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गहरे रंग जैसे कि भूरा, मरून, या दार्क ग्रे आंतरिक दरवाजों के लिए उपयुक्त होते हैं। बाहरी दरवाजों के लिए चांदी, सोने या गहरे लाल रंग का चयन किया जा सकता है।
  3. खिड़कियों की स्थापना: खिड़कियाँ प्रकाश और हवा के प्रवाह को अनुमति देती हैं, इसलिए उनकी स्थापना संगठित और सही दिशा में होनी चाहिए। अवशेष के रूप में, उच्च स्थानों पर स्थापित खिड़कियाँ प्रकाश और हवा को अधिक मुहैया कराती हैं।
  4. खिड़की के रंग: खिड़कियों के रंग का चयन आपके घर की बाहरी उपस्थिति और वातावरण के साथ मेल खाना चाहिए। ग्रीन, ब्लू, या ग्रे रंग की खिड़कियाँ प्राकृतिक वातावरण को दर्शाती हैं। दूसरी ओर, ब्राउन, ब्लैक या वायलेट के रंग की खिड़कियाँ मॉडर्न और सम्प्रदायशील दोनों भावनाओं को दर्शाती हैं।

उपकरण और सामग्री

घर की संरचना में उपयोग होने वाले उपकरण और सामग्री को वास्तु शास्त्र के दिशानिर्देशों के अनुसार चुनना चाहिए। यहां कुछ मुख्य उपकरण और सामग्री के बारे में जानकारी दी जा रही है:

  1. वास्तु प्यामा: एक वास्तु प्यामा या वास्तु यंत्र का उपयोग करके आप घर की संरचना में सही दिशा, लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई, आदि को माप सकते हैं। यह आपको वास्तु के मूल नियमों का पालन करने में मदद करता है।
  2. स्थापत्य सामग्री: आपको वास्तुशास्त्र के मानकों के अनुसार सही स्थापत्य सामग्री का चयन करना चाहिए। उदाहरण के लिए, घर के लिए उचित और एकाग्र वस्तु, आकृति के अनुसार विनियोजित फर्नीचर, प्राकृतिक तत्वों जैसे पत्थर, लकड़ी, चांदी, सोने की चीजें, आदि का उपयोग कर सकते हैं।
  3. दरवाजे और खिड़कियाँ: दरवाजे और खिड़कियों की सामग्री और डिज़ाइन बाहरी और आंतरिक दृष्टि से आपके घर को प्रभावित करती हैं। उन्हें उचित और उद्यमी बनाए रखने के लिए उचित माप, स्थानिकता, और प्रकाश उपयोग करना चाहिए।
  4. प्रकाशीय उपकरण: यहां प्रकाशीय उपकरण जैसे बत्तियाँ, लैंप, चांदेलियर, आदि का चयन भी महत्वपूर्ण है। आपको सही प्रकाशीय उपकरण का चयन करते समय प्रकाश की गुणवत्ता, आपके आवश्यकताओं के अनुसार विन्यास, और स्थानिकता को ध्यान में रखना चाहिए।
  5. उपहार, वस्त्र और आभूषण: घर की संरचना में उपयोग होने वाले उपहार, वस्त्र और आभूषण भी महत्वपूर्ण हैं। इनका चयन आपके आंतरिक और बाहरी वातावरण को बनाए रखने के लिए सामर्थ्य और भावनाओं को प्रकट करने में मदद कर सकता है।

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