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Transforming Adversity into Success: The Power of Embracing Your Flaws (बुरे बनो तभी सफल बनोगे)

Transforming Adversity into Success: The Power of Embracing Your Flaws (बुरे बनो तभी सफल बनोगे)

लाख बुरे है हम पर तुम तो अपनी अच्छाई दिखाओ ! हम बुरे नहीं थे अब तुम याद करो तुमने हर बार हमे बुरे वक्त में ही याद किया है आज तो इसलिए बुरा बन गया हूँ क्योकि तुम्हारा बुरा वक़्त बीत गया है और अच्छा वक़्त आ गया है! चाँद उगता गया और सूरज ढलता गया मैं ज्यादा अच्छा बनने की कोशिश में सबकी नज़र में बुरा बनता गया। वक़्त बुरा है साहब मैं बुरा नहीं ! और अगर मैं बुरा हूँ तो फिर कोई भी अच्छा नहीं ! जब-जब अच्छाई की खोज में निकला दुनिया ने मुझे बुरा कहके पुकारा और जब-जब लोगो के बुरे वक़्त में साथ दिया लोगो ने मुझे अच्छा कहके पुकारा।

आज का यह स्पीच बहुत ही जरुरी टॉपिक पर है अगर आपने इसे पूरी अच्छी तरह से समझ लिया तो इसी वक़्त से आपकी ज़िंदगी की आधी से ज्यादा समस्या ख़त्म हो जाएगी और ज़िंदगी पटरी पे दौड़ने लगेगी और ज़िंदगी में फैसला अच्छा लेने लगोगे।

बचपन में एक बार मेरे पिताजी ने मुझे कहाँ की जा बकरी चराने के लिए एक लकड़ी खेत से ले आ। मैं एक कुलाड़ी लेकर खेत में गया और पहला कुलाड़ी एक बहुत ही सीधे-साधे पेड़ पर पड़ा उस डाली पर कोई कांटे नहीं थे और उसको काटना बहुत आसान था उसी के बगल में एक दूसरा बाबुल का पेड़ था जो पूरा काँटों से भरा था।

मैंने उस पेड़ में तो पास में भी जाना नहीं सोची आखिर मैं अपने हाथो में कांटे क्यों चुभाउ। अब इंसानो के साथ में भी बिलकुल ऐसा ही होता है जो इंसान टेढ़ा होता है ना थोड़ा काम अच्छा होता है ना उसको ज्यादा डिस्टर्ब नहीं किया जाता है उसको ज्यादा तंग नहीं किया जाता है आम तौर पर उसकी बातें मान ली जाती है।

वही अगर कोई सीधा इंसान होता है तो उसको अपनी बात मनवाने के लिए पापड़ बेलने पड़ते है और लास्ट में उसको वही मानना पड़ता है जैसा लोग उसको मनवाना चाहते है। आज हम बात करेंगे की बुरा बनना क्यों जरुरी है, टेढ़ा बनना क्यों जरुई है और कैसे बने? ज़िंदगी में अगर आपने दो चीज़ो को सही समय पर सही ढंग से Use करना सीख लिया तो कभी धोखा नहीं खाओगे , कभी मन में पछतावा नहीं रहेगा फिर चाहे लोग आपको टेढ़ा बोले या बुरा बोले। पहला चीज़ है हां और दूसरी चीज़ है ना।

अगर आपने ज़िंदगी में सीख लिया की कब आपको हां कहना है और कब ना कहना है तो भले ही आपको लोग कुछ भी बोले, आपको कितना भी बुरा बोले, कितना ही ज़िद्दी बोले, कितना ही बुद्धू माने, लेकिन आप अगर देखोगे ना अपने लाइफ में पलटकर तो कम से कम आपको किसी भी बात का पछतावा नहीं रहेगा।

आप मुझे ये बताओ की ये जो ज़िंदगी जी रहे हो वो ना आपको बबलू के नाम पर मिली है, टोनी के नाम पर मिली है, ना रानी के नाम पर मिली है। ये जी ज़िंदगी है आपकी वो आपके अपने खुद के नाम की मिली है ये हमारे बाप के नाम की भी नहीं है उनको अलग ज़िंदगी मिली है और हमे अलग ज़िंदगी मिली है।

जो तुम्हारा नाम है ना उस नाम के हज़ारो इंसान है इस दुनिया में आप लोग तो रोज़ फेसबुक, इंस्टाग्राम में सर्च मार कर तो देखते होंगे। फिर कौन सी ऐसी चीज़ है जो तुम्हे तुम्हारे उन नामो से अलग बनती है Your Unique Personality और उसकी Uniqueness तब तक ही रहती है जब तक आप किसी और से अफेक्टेड होकर किसी और के बातो में आकर उनके जैसा ना करने लग जाओ।

जिस टाइम पर आपने अपने Yes और No वाले डिसिशन को गिवअप कर दिया ना उसी टाइम आपकी ये जो Uniqueness है ख़त्म हो जाएगी। अगर आपको लग रहा है की कोई काम आप से जबरदस्ती करवाई जा रही है और उसमे आपकी ख़ुशी नहीं है और वो आपके नज़रो में गलत है तो उसको वही पर गुड बाय बोल दो, लोग आपको डेढ़ा, बोलेंगे बुरा बोलेंगे बोलने दो।

अगर आपको लग रहा है की आपका फायदा है किसी माशूम का नुक्सान नहीं है आपको ख़ुशी मिल रही है आप ग्रो करने वाले है आपको लगता है की उससे कुछ सिखने को मिलेगा तो हां बोल सकते हो।

आपका जो डिसिशन है ना हां बोलने का और ना बोलने का वो टोटली आपकी मेंटेलिटी पर डिपेंड करना चाहिए। अगर आपको कोई आग में कूदने को बोलेगा तो कूद जाओगे क्या, नहीं कूदोगे ना। लेकिन अगर कोई आपका टाइम बर्बाद करेगा तो उसको Allow करते रहोगे क्योकि उसमे आपको तुरंत नुक्सान नहीं हो रहा है लेकिन अगर आप उसके कहने से आग में कूद जाओगे तो उसमे आपका तुरंत नुक्सान हो जायेगा तुरंत जल जाओगे। इसमें एक बात निकल का आयी की आप ज्यादा दूर की नहीं सोचते। आप सोचते हो की कोई प्रोबेम नहीं है जैसा चल रहा है वैसा चलने दो।

वही अगर आप ये सोचोगे की यही टाइम की बर्बादी Long टाइम में आपको कितना नुक्सान दे सकती है तो आप आज से ही गप्पे लड़ाना बंद कर दोगे, दुसरो के फालतू के कामो के लिए टाइम वैस्ट करना बंद कर दोगे। आप को ये लगा है ना की अगर मैं मना कर दिया तो अगला इंसान मुझे गलत सोचेगा या फिर कभी मुझे जरुरत पड़ेगी तो साथ नहीं देगा।

ये जो अकेले होने का फियर है ना वही लोगो के “हां” को “ना” में और “ना” को “हां” में बदल देता है और बदले में आपको क्या मिलता है समय की बर्बादी और सामने वाला का काम निकल जाता है वो अपना फायदा लेकर निकल लेता है और तुम पछतावे को लेकर बैठे रहते हो की काश उस दिन मैं ऐसा नहीं किया होता।

टेढ़ा बनना बहुत जरुई है भाई नहीं तो खड़े-खड़े बिक जाओगे। अगर आप सॉफ्ट टारगेट रहोगे ना किसी के लिए तो वो आपको पहले ही निशाना बना लेगा। हां, मैं मानता हूँ की सॉफ्टनेस जरुरी है दिल में पर इतना बेवकूफ बनना जरुरी नहीं है की अगला व्यक्ति कुछ भी बोल जाये और आप आँख बंद कर के उस पे भरोषा करते जाओ।

आप ये देखो की अगर अगले व्यक्ति का नुक्सान होता आपके साथ तो वो रुकता तुम्हारे साथ अगर मैं ठीक उसको वैसा ही करने को बोलता जैसे वो मुझे करने को बोल रहा है तो क्या वो भी मानता मेरी बात। क्या सामने वाला भी हमारी टाइम की इज्जत करता है या केवल मैं ही उसके लिए अपना टाइम बर्बाद कर रहा हूँ।

जैसा वो बोल रहा है वैसा करने से मैं किसी को हर्ट तो नहीं कर रहा या मेरी इज्जत की तो वाट नहीं लग रही। जब भी हां और ना बोलने का समय हो ना तो हर पहेलु को ठीक से चेक कर लो कई बार हम थोड़े से फायदे के चक्कर में सीधा बनकर अगले बन्दे की बात मान लेते है पर ये नहीं देखते की उस थोड़े से फायदे के चक्कर में बाद में बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है।

कई बार अच्छा बनने के चक्कर में या अपना रिस्ता बचाने के चक्कर में गलत को भी सही बताने लगते है और अच्छा बन जाते है। पर ये नहीं देखते की ये जो इंसान हमारे साथ ऐसा कर रहा है ना, ये ऐसा बोल रहा है ना वो किसी और को भी जा कर बोलता होगा हमारे बारे में ये नहीं सोचोगे। इसीलिए कहता हूँ की सही है तो उसको सही बोलो और अगर कोई चीज़ गलत है तो उसको गलत बोलो फिर चाहे आपको लोग बुरा बोले, टेढ़ा बोले, या कुछ भी बोले।

लास्ट में मैं एक ही बात बोलना चाहता हूँ कहते है की अच्छो को दुसरो में अच्छाईया और बुरो को दुसरो में बुराईया ही नज़र आती है इसीलिए अगर तुमको कोई बुरा बोले, टेढ़ा बोले तो उसके बातो का नहीं बल्कि खुद के ऊपर ध्यान देना की क्या तुम सच में बुरे हो किसी को माफ़ कर के अच्छा बन जाओ लेकिन किसी का स्वार्थ पूरा करने के लिए बेवकूफ मत बनो।

चाहे दुसरो के नज़र में अच्छे बनो या बुरे बस ऐसा बनो की कोई तुम्हारे जैसा ना बन पाए और अगर अच्छा बनो तो बेवजह बनना कोई वजह से तो हर कोई अच्छा बन जाता है।

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